
नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026: ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने फिलहाल इस व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और मामले में आगे सुनवाई जारी रहेगी।
केंद्र सरकार से मांगा गया जवाब
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित MDR व्यवस्था के आधार और इसे लागू करने के फैसले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल MDR व्यवस्था पर रोक लगाने का कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है। ऐसे में प्रस्तावित प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
सरकार ने कहा- यह टैक्स नहीं है
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है। सरकार के अनुसार, यह डिजिटल पेमेंट सिस्टम में शामिल बैंकों और अन्य संस्थाओं के बीच होने वाला सेटलमेंट संबंधी चार्ज है।
सरकार को अब इस संबंध में अदालत के सामने अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा।
96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर असर नहीं
केंद्र सरकार के अनुसार, प्रस्तावित MDR व्यवस्था से करीब 96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन प्रभावित नहीं होंगे।
₹2,000 तक के पात्र UPI मर्चेंट पेमेंट मौजूदा zero-MDR व्यवस्था के तहत जारी रहेंगे। वहीं, Person-to-Person यानी P2P UPI पेमेंट पर भी यह मर्चेंट चार्ज लागू नहीं होगा।
₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कुछ निर्धारित कैटेगरी में ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा।
पात्र ट्रांजैक्शन के लिए MDR 0.4% तक हो सकता है, जबकि कुछ मामलों में इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन निर्धारित की गई है। लागू शुल्क ट्रांजैक्शन की कैटेगरी और संबंधित नियमों पर निर्भर करेगा।
क्या ग्राहकों से सीधे चार्ज लिया जाएगा?
MDR को ग्राहक के बैंक खाते से सीधे काटे जाने वाले सामान्य UPI ट्रांजैक्शन चार्ज के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि P2P UPI पेमेंट पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।
हालांकि, मर्चेंट को MDR की लागत वहन करनी होगी। कारोबारी इस लागत को खुद वहन करते हैं या अपने बिजनेस मॉडल के अनुसार इसका प्रभाव ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, यह अलग-अलग मामलों में अलग हो सकता है।
15 अक्टूबर से लागू होने का प्रस्ताव
प्रस्तावित MDR व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम रोक से इनकार किए जाने के बाद फिलहाल इसके कार्यान्वयन पर अदालत की ओर से कोई रोक नहीं है।
अब केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करना होगा और इसके बाद मामले में आगे न्यायिक सुनवाई होगी।
आगे क्या होगा?
फिलहाल ₹2,000 से अधिक के पात्र UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित MDR व्यवस्था पर कोई अंतरिम रोक नहीं है। हालांकि, मामले की सुनवाई अभी जारी है और अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट के आगे के आदेश और अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी।

5 FAQs
1. क्या ₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा?
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कुछ निर्धारित मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा।
2. क्या हर ₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर MDR लगेगा?
नहीं। MDR कुछ निर्धारित कैटेगरी के पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा।
3. क्या UPI ग्राहक के बैंक खाते से सीधे चार्ज कटेगा?
MDR मर्चेंट-साइड चार्ज है और इसे ग्राहक के सामान्य UPI ट्रांजैक्शन शुल्क के समान नहीं माना गया है।
4. ₹2,000 तक के UPI पेमेंट का क्या होगा?
पात्र ₹2,000 तक के UPI मर्चेंट पेमेंट मौजूदा zero-MDR व्यवस्था के तहत जारी रहेंगे।
5. MDR व्यवस्था कब से लागू होने वाली है?
प्रस्तावित MDR व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस पर अंतरिम रोक नहीं लगाई है।
